मंगल दोष लग्न, चंद्र और शुक्र — तीनों से देखा जाता है, सिर्फ़ लग्न से नहीं। कौन-से भाव, कितनी तीव्रता, और वे स्थितियाँ जिनमें शास्त्र स्वयं इसे शमित मानते हैं।Mangal Dosh is read from the Lagna, the Moon AND Venus — not the Lagna alone. Which houses, how severe, and when the classics themselves treat it as cancelled.
जिस बात से सबसे ज़्यादा घर परेशान होते हैं, वह यह है कि किसी ने कह दिया "लड़की मांगलिक है"। और अक्सर वह बात एक ही चीज़ देखकर कही गई होती है — लग्न से मंगल का भाव। शास्त्र इतने से नहीं रुकते।
मंगल जिन भावों में बैठकर यह दोष बनाता है, वे पाँच हैं — पहला, चौथा, सातवाँ, आठवाँ और बारहवाँ।
पर भाव किससे गिना जाए, यही असली प्रश्न है। परंपरा तीन जगह से गिनने को कहती है:
तीनों में से मंगल कितनी जगह उन पाँच भावों में पड़ रहा है, उसी से तीव्रता तय होती है:
मंगल हर स्थिति में एक-सा फल नहीं देता। शास्त्र स्वयं कुछ स्थितियों में इसे हल्का मानते हैं:
इनके अलावा गुरु की दृष्टि, दोनों कुंडलियों में दोष का होना, और आयु का विचार — ये सब पारंपरिक परिहार हैं, जिन्हें पंडित जी दोनों कुंडली सामने रखकर तौलते हैं।
एक बात साफ़ रहे: मांगलिक होना अपने आप में कोई निर्णय नहीं है। यह एक स्थिति है, जिसे बाकी कुंडली के साथ तौला जाता है — मंगल का बल, गुरु की दृष्टि, दूसरी कुंडली में वही दोष, और चल रही दशा।
जो लोग सिर्फ़ "मांगलिक है या नहीं" पूछकर रिश्ता तय या रद्द कर देते हैं, वे उस प्रश्न का आधा उत्तर लेकर लौटते हैं।
इस पृष्ठ पर दोनों कुंडली डालिए। मिलान में मंगल दोष तीनों — लग्न, चंद्र और शुक्र — से जाँचा जाता है, तीव्रता बताई जाती है, और यदि मंगल अपनी राशि या उच्च का है तो वह भी लिखकर आता है। साथ में 36 गुण का पूरा मिलान भी।
यह लेख सामान्य नियम बताता है। आपकी अपनी कुंडली क्या कहती है, वह यहाँ नि:शुल्क देखिए।This article gives the general rule. What your own chart says is free to check here.
दोनों कुंडली मिलाकर देखिएMatch both charts