संक्षेप में उत्तर
प्रदक्षिणा का अर्थ है देवता को अपनी दाहिनी ओर रखते हुए उनके चारों ओर घूमना — आदर प्रकट करने की एक बहुत पुरानी भारतीय रीति।
कितनी बार घूमना है, इस पर परंपराएँ अलग-अलग हैं और वे आपस में मेल नहीं खातीं।
यह लोकमान्यता है — शास्त्रीय प्रमाण हमें नहीं मिला
परंपरागत मान्यता
सामान्य मान्यता में गणेश जी की एक, सूर्य की सात, विष्णु की चार, शिव की आधी प्रदक्षिणा की जाती है।
शिव की आधी प्रदक्षिणा का कारण जलहरी (सोमसूत्र) बताया जाता है — जल-निकास की उस धारा को लाँघा नहीं जाता, इसलिए वहाँ तक जाकर लौट आते हैं और दूसरी ओर से फिर वहीं तक जाते हैं।
यह गिनती हर सम्प्रदाय में एक जैसी नहीं है।
शास्त्रीय संदर्भ
इस विषय पर हमें कोई निश्चित ग्रंथ-संदर्भ नहीं मिला। नीचे जो लिखा है वह
परंपरा और व्यवहार पर आधारित है — शास्त्र-वचन के रूप में न लें।
सरल व्याख्या
दाहिनी ओर रखना आदर का संकेत है — यही भाव किसी बड़े के चरण छूकर दाहिनी ओर से हटने में भी है।
सोमसूत्र वाला कारण व्यावहारिक भी है: जलहरी से बहता जल पवित्र माना जाता है, और उस पर पैर पड़ना अनुचित। नियम आस्था का है, पर उसका आधार वहाँ रखी हुई एक ठोस चीज़ है।
क्या प्रमाणित है
यह कि प्रदक्षिणा का अर्थ ही "दाहिनी ओर रखते हुए" है, और यह कि शिव मंदिर में जलहरी की धारा को न लाँघने की रीति व्यापक रूप से मानी जाती है।
क्या लोकमान्यता है
किस देवता की कितनी प्रदक्षिणा — एक, चार, सात, आधी — यह पूरी गिनती परंपरागत है। अलग-अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में यह अलग है, और हमें इसका कोई एक निश्चित ग्रंथ-आधार नहीं मिला।
जहाँ शास्त्रीय प्रमाण उपलब्ध नहीं होता, हम उसे लोकमान्यता कहकर लिखते हैं —
और जहाँ ग्रंथों में मतभेद है, वह भी बता देते हैं।